कुलदेवी, रीति-रिवाज और लोक-विश्वास
विरासत: हमारा अस्तित्व, हमारा स्वाभिमान
विरासत और धरोहर केवल अतीत के अवशेष नहीं, बल्कि किसी भी समाज की आत्मा और पहचान होते हैं। जिस समाज की जड़ें अपने इतिहास से कट जाती हैं, उसका भविष्य समय की आंधी में तिनके की तरह बिखर जाता है। हमारे पूर्वजों ने अपने रक्त और त्याग से जो गौरवशाली इतिहास लिखा है, उसे आज के आधुनिक युग में विस्मृत होने से बचाना हमारा परम धर्म और नैतिक दायित्व है। यदि आज हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी ही जड़ों और संस्कृति से अनजान रह जाएंगी।
हमारा उद्देश्य (Our Mission):
समय की धूल में इतिहास धुंधला हो सकता है, लेकिन मिट नहीं सकता। इस वेबसाइट का उद्देश्य सोनगरा वंश की लुप्त होती जानकारी, ताम्रपत्रों, बहियों और लोकगाथाओं को डिजिटल रूप में संरक्षित करना है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवमयी अतीत पर गर्व कर सकें।
जुड़ें और सहयोग करें “यह इतिहास हम सबका है। यदि आपके पास अपने परिवार, गाँव या सोनगरा इतिहास से जुड़ी कोई जानकारी, पुरानी फोटो या सुझाव है, तो हमारे साथ साझा करें।
— लक्ष्मण सिंह सोनगरा (ठिकाना: गुड़ा सोनीगरा, पाली – मारवाड़)
वीर शिरोमणि जसवंत सिंह जी (सोनगरा) एवं महासती सिणगारदे जी स्मारक संरक्षण अभियान
वीर शिरोमणि जसवंत सिंह जी (सोनगरा) व महासती सिणगारदे जी का इतिहास शौर्य और सतीत्व का अद्भुत संगम है। जसवंत सिंह जी ने धर्म और मातृभूमि की रक्षा हेतु प्राण न्योछावर किए, वहीं सिणगारदे जी ने उनके पीछे सती होकर पातिव्रत्य का आदर्श प्रस्तुत किया। वर्तमान में उनका प्राचीन स्मारक (नाडोल) जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है, जिसे संरक्षित करना हमारी सांस्कृतिक धरोहर के लिए अनिवार्य है।



