जालौर केंद्र से प्रमुख क्रम
सुवर्णगिरी का सूर्यवंश
सोनगरा चौहानों की वंशावली केवल नामों की सूची नहीं, बल्कि शौर्य और त्याग की एक निरंतर धारा है। यह वंश नाडोल के राव अल्हण के पुत्र राव कीर्तिपाल से आरंभ होकर जालौर के सुवर्णगिरी दुर्ग पर अपनी पताका फहराता है। 1311 ई. के ऐतिहासिक साके के बाद भी यह रक्त रुका नहीं, बल्कि पाली और मारवाड़ के विभिन्न ठिकानों के रूप में आज भी अपनी आन-बान-शान के साथ जीवित है।
जालौर (सुवर्णगिरी) के प्रतापी शासक
(सोनगरा साम्राज्य की नींव रखने वाले और उसे शिखर तक पहुँचाने वाले महान राजा)
- राव कीर्तिपाल (कीतू) चौहान (1181-1182 ई.)
- संस्थापक: नाडोल शाखा से अलग होकर जालौर में सोनगरा वंश की स्थापना की।
- उपलब्धि: परमारों को हराकर सुवर्णगिरी दुर्ग जीता और ‘राजेश्वर’ की उपाधि धारण की।
- राव समरसिंह (1182-1205 ई.)
- इन्होंने जालौर दुर्ग को मजबूती दी, कोठा (शस्त्रागार) बनवाए और राज्य की सीमाओं को सुरक्षित किया।
- राव उदयसिंह सोनगरा (1205-1257 ई.)
- स्वर्ण काल: इनके शासन को जालौर का ‘स्वर्ण युग’ कहा जाता है।
- पराक्रम: इन्होंने दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश को युद्ध में हराकर वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। इनका साम्राज्य नाडोल, बाड़मेर, भीनमाल और सिरोही तक फैला था।
- राव चाचिगदेव (1257-1282 ई.)
- इन्होंने अपने पिता के विशाल साम्राज्य को सुरक्षित रखा और ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि प्राप्त की। यह शांति और समृद्धि का काल था।
- राव सामंत सिंह (1282-1305 ई.)
- इनके शासनकाल में ही अलाउद्दीन खिलजी की सेनाओं के साथ संघर्ष का सूत्रपात हुआ। बाद में इन्होंने अपने योग्य पुत्र कान्हड़देव को राजकाज सौंपा।
- राव कान्हड़देव और वीरमदेव सोनगरा (1305-1311 ई.)
अमर बलिदान: यह पिता-पुत्र की जोड़ी इतिहास में अमर है। 1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के विरुद्ध हुए भीषण युद्ध और जालौर के साके में इन्होंने मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर कर दिए, लेकिन तुर्कों की अधीनता स्वीकार नहीं की।
पाली अध्याय और विस्तार
(जालौर के बाद वंश का प्रवाह)
राव अखेराज जी सोनगरा (रोटे राव): जालौर के बाद सोनगरा शक्ति का केंद्र पाली बना। अखेराज जी ने मारवाड़ और मेवाड़ के इतिहास में निर्णायक भूमिका निभाई। वर्तमान में मारवाड़ के अधिकतर सोनगरा ठिकाने इन्हीं के वंशज माने जाते हैं।
प्रमुख सोनगरा ठिकाने
(हमारे वंशज जहाँ-जहाँ जाकर बसे और जागीरें स्थापित कीं)
नीचे प्रमुख ठिकानों की सूची दी गई है। अपने ठिकाने का इतिहास पढ़ने के लिए नाम पर क्लिक करें: (नोट: यह सूची निर्माणाधीन है, हम इसे लगातार अपडेट कर रहे हैं)
मारवाड़ क्षेत्र के प्रमुख ठिकाने:
- गुड़ा सोनीगरा (Gura Sonigara) — (वर्तमान ठिकाना)
- डेन्डा (Denda)
- कुरना (Kurna)
- कान्दरा (Kandra)
- एलानी (Elani)
- गिरवर (Girvar)
- बोया (Boya)
- सादड़ा (Sadra)
- केनपुरा (Kenpura)
- बाला (Bala)
- दयालपुरा (Dayalpura)
